Thursday, January 13, 2011

बांग्लादेशी घुसपैठ दिल्ली के लिए बड़ा खतरा : उल्फा

प्रतिबंधित संगठन उल्फा ने पहली बार असम में बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ आवाज उठाते हुए चेतावनी दी कि जल्दी ही यह समस्या दिल्ली के लिए बड़ा खतरा बन जाएगी। यह चेतावनी उल्फा के स्वयंभू विदेश सचिव सशधर चौधरी ने दी है। चौधरी को मंगलवार को गुवाहाटी केंद्रीय जेल से जमानत पर रिहा किया गया है। चौधरी ने जेल से बाहर आने के बाद उम्मीद जताई कि सरकार के साथ बातचीत जल्दी ही शुरू होगी। सशधर चौधरी ने नलवाड़ी पहुंचकर एक रैली को संबोधित किया। इसमें उन्होंने कहा कि अवैध बांग्लादेशी नागरिक मुद्दा राज्य के लिए गंभीर खतरा है। चौधरी ने कहा कि अगर मैं उल्फा और भारत सरकार के बीच शांति वार्ता में शामिल किया जाता हूं तो मेरा पहला एजेंडा बांग्लादेशी अप्रवासन मुद्दे को उठाना होगा। चौधरी को दिसंबर 2009 में बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे की अनदेखी करती रहती है तो यह जल्दी ही दिल्ली के लिए बड़ा खतरा बन जाएगा। सभा के बाद उल्फा नेता अपने पैतृक स्थान हेलोसा के लिए रवाना हो गए। इससे पहले गुवाहाटी में जेल के बाहर प्रतीक्षारत मीडियाकर्मियों से चौधरी ने कहा कि बातचीत से ही समस्या का हल हो सकता है और जल्दी ही शांतिपूर्ण माहौल में बातचीत होगी। हम 27 साल से भूमिगत रहे हैं लेकिन संघर्ष लोगों से बड़ा नहीं है। बातचीत के लिए एजेंडा तैयार किया जाएगा और लोगों की सभी मांगें उठाई जाएंगी। उल्फा के शीर्ष नेता ने सरकार, न्यायपालिका और जेल अधिकारियों के प्रति आभार जताया। बाद में वह अपने पैतृक स्थान के लिए रवाना हो गए। चौधरी और उल्फा के वित्त सचिव चित्रवन हजारिका को विशेष टाडा अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी थी। चौधरी को टाडा के चार मामलों में जमानत दी गई जबकि हजारिका के खिलाफ तीन मामले लंबित थे। उल्फा के दोनों नेताओं को नवंबर 2009 में बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया था। बाद में बांग्लादेश ने दोनों को भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया। इसके बाद वे गुवाहाटी केंद्रीय जेल में बंद थे। संगठन के प्रमुख अरविन्द राजखोवा, विचारक भीमकांत बरागोहैन, उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई सहित कई अन्य नेताओं को पहले ही जमानत पर रिहा किया जा चुका है। सरकार ने शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उनकी जमानत का विरोध नहीं करने का फैसला किया था।

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