Friday, March 18, 2011

जम्मू-कश्मीर में अलग प्रधानमंत्री पद की सिफारिश पर हंगामा



 जम्मू कश्मीर में अमन बहाली के नाम पर जम्मू-कश्मीर में सदर ए रियासत (राष्ट्रपति) और वजीर ए आजम(प्रधानमंत्री) पद की बहाली करने की केंद्रीय वार्ताकारों की सिफारिश संबंधी खबरों पर गुरुवार को विधानसभा में खूब हंगामा हुआ। भाजपा, पैंथर्स पार्टी और जम्मू स्टेट मोर्चा ने इस मुद्दे पर हंगामा मचाया और बाद में सदन से वॉकआउट कर गए। हालांकि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है। भाजपा विधायक दल के नेता चमन लाल गुप्ता ने कहा कि अगर किसी ने जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ रिश्तों को कमजोर बनाने की साजिश की तो हम उसका मुकाबला करेंगे। अलबत्ता, सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस ने वार्ताकारों की सिफारिश का स्वागत करते हुए कहा कि सभी जानते हैं कि अगर घड़ी खराब हो तो उसे ठीक करने के लिए सूई को आगे-पीछे किया जा सकता है। पैंथर्स पार्टी के हर्ष देव सिंह ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि केंद्रीय वार्ताकारों ने राज्य में वजीर ए आजम और सदर ए रियासत की बहाली की बात कर घड़ी की सुइयों को पीछे करने का प्रयास किया है। उनका कहना था कि वार्ताकारों ने जम्मू-कश्मीर को वृहद स्वायत्तता देने का प्रयास करते हुए राष्ट्रीय सतह पर एक नई बहस और विवाद को जन्म दे दिया है। पीडीपी के निजामदीन भट्ट ने कहा कि हमें इस रिपोर्ट पर बहस की जरूरत नहीं है। वार्ताकारों की नियुक्ति केंद्र सरकार ने की है। इसके अलावा उनकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए अभी इस मुद्दे पर बहस की जरूरत नहीं है। उनकी ही पार्टी के अब्दुल रहमान वीरी ने कहा कि हाल ही में वार्ताकारों के साथ कश्मीर आई माकपा सांसद वृंदा करात ने संसद में कहा कि कश्मीर के हालात खतरनाक हैं

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